दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते अक्टूबर से दिसंबर के बीच कूनो लाने की तैयारी
चार वर्षों में कूनो से आगे बढ़कर गांधी सागर तक चीता पहुंच चुका है।
अब नौरादेही तथा गुजरात के बन्नी घास के मैदानों को भी परियोजना के विस्तार से जोड़ा जा रहा है।
वर्तमान में देश में 52 चीते हैं। इनमें 49 कूनो राष्ट्रीय उद्यान और तीन गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में हैं।
डिजिटल डेस्क न्यूज़/भोपाल। भारत में विलुप्त हो चुके चीते को फिर से बसाने की परियोजना के चार वर्ष पूरे हो चुके हैं। 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़कर शुरू हुई यह परियोजना अब नए चरण में पहुंच गई है। चार वर्षों में कूनो से आगे बढ़कर गांधी सागर तक चीता पहुंच चुका है और अब नौरादेही तथा गुजरात के बन्नी घास के मैदानों को भी परियोजना के विस्तार से जोड़ा जा रहा है। अगले छह वर्षों में कूनो-गांधी सागर परिदृश्य में करीब 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 60 से 70 चीतों की सक्षम मेटापॉपुलेशन विकसित करने का लक्ष्य है।
वर्तमान में देश में 52 चीते हैं। इनमें 49 कूनो राष्ट्रीय उद्यान और तीन गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में हैं। कुल 52 में से 32 चीते भारत में जन्मे हैं। यह संख्या जून 2026 में कूनो की समीक्षा के दौरान अधिकारियों द्वारा संबंधित उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन पर कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को छोड़ा था। इनमें पांच मादा और तीन नर थे। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए। फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नौ और चीते भारत पहुंचे।
अक्टूबर-दिसंबर में कूनो आएंगे 12 और चीते
दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते अक्टूबर से दिसंबर के बीच कूनो लाने की तैयारी है। इसकी तारीख अगले एक महीने में तय होने की संभावना है। चीतों की संख्या बढ़ने के साथ कूनो पर दबाव कम करने और आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के लिए दूसरे और तीसरे ठिकाने विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत में जन्मे चीतों को गुजरात के बन्नी, मंदसौर के गांधी सागर और नौरादेही क्षेत्र में भेजने की तैयारी है।
गुजरात के बन्नी में बनेगा संरक्षण प्रजनन केंद्र
गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में चीतों के लिए संरक्षण प्रजनन केंद्र तैयार किया जा रहा है। यहां करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में बाड़ा बनाया गया है। चीतों को पहले यहां अनुकूलन (Acclimatization) के लिए रखा जाएगा और इसके बाद उन्हें खुले क्षेत्र में छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। बन्नी को भविष्य में चीता प्रजनन और विस्तार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।




















Discussion about this post