परमहंस परमानंद गिरी के शिष्य योगविज्ञानंद जी ने अपने गुरु भाई की मृत्यु पर मीडिया से बातचीत में खुलकर अपनी बात रखी और इन्होंने गुरु भाई महंत बजरंग गिरी की मृत्यु बहुत ही संदिग्ध परिस्थितियों में होना बताया है।
डिजिटल डेस्क न्यूज़। मेरे गुरु भाई महंत बजरंग गिरी जी की मृत्यु बहुत ही संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है एवं उनका शव परीक्षण नहीं करवाया गया है जबकि उनके शव पर चोटों के निशान थे। यह कहना है परमहंस परमानंद गिरी के शिष्य योगविज्ञानंद जी ने अपने गुरु भाई की मृत्यु पर मीडिया से बातचीत में खुलकर अपनी बात रखी और इन्होंने गुरु भाई महंत बजरंग गिरी की मृत्यु बहुत ही संदिग्ध परिस्थितियों में होना बताया है।
इन्होंने मीडिया को प्रेस नोट जारी करते हुए और प्रेस वार्ता के माध्यम से बताया कि इनके गुरु श्री परमहंस परमानंद गिरी के दो आश्रम मध्य प्रदेश में हैं। एक सतधारा आश्रम जिला नरसिंहपुर तथा दूसरा आश्रम रुद्रधाम रमगढ़ा तहसील रेहटी जिला सीहोर में स्थित है। दोनों आश्रमों का संचालन इनके गुरु परमहंस परमानंद जी द्वारा किया जाता था, उनके तीन शिष्य थे। बजरंग गिरी, गोविंदानंद गिरी, योग विज्ञानानंद गिरी ही थे।

जिनमें गोविंदानंद गिरी जी का स्वर्गवास दिनांक 03/02/2026 को हो चुका है।गुरुदेव परमहंस परमानंद जी का स्वर्गवास दिनांक 30/08/2026 को सतधारा आश्रम में हो गया था। गुरुदेव के स्वर्गवास के पश्चात गुरु शिष्य परंपरा के अनुसार उक्त आश्रमों का संचालन इनके बड़े गुरु भाई महंत बजरंग गिरी द्वारा किया जा रहा था।
गुरुदेव के स्वर्गवास के 13 दिन पश्चात इन्हें सूचना प्राप्त होती है की गुरु भाई महंत बजरंगदास गिरी जी का स्वर्गवास हो गया है, जिस कारण उनके अंतिम समाधि कार्यक्रम में सम्मलित होने के लिए ये रेहटी स्थित रुद्रधाम आश्रम के लिए निकले परंतु आश्रम में कुछ लोगों के द्वारा उनकी यानि अमन और धीरज की प्रतीक्षा किए बगैर तीव्रता से प्रायोजित तरीके से गुरू भाई की अंतिम समाधि प्रक्रिया संपादित करवाई जा रही थी, जब वे वहां पहुंचे तो जानकारी प्राप्त हुई की उनके गुरु भाई महंत बजरंग गिरी जी की मृत्यु बहुत ही संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, एवं उनका शव परीक्षण नहीं करवाया गया है, जबकि उनके शव पर चोटों के निशान थे।
रुद्रधाम आश्रम में मेरे गुरु जी के कमरे में 80 00000/रुपए नकद एवं सवा किलो सोना व एक स्वर्ण युक्त शिविलिंग था जो गायब था व गुरुभाई बजरंग गिरी के कमरे में 70 00000/रुपए नकद रखे थे, जो गायब थे। आश्रम में गुरुभाई के अंतिम कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों द्वारा किसी बर्फानी बाबा को आश्रम का महंत घोषित करने का प्रयास किया जा रहा था, जबकि उक्त बर्फानी बाबा ना तो मेरी गुरु परंपरा से संबंधित हैं न ही मेरे गुरु से उनका कोई संबंध है।
गुरु शिष्य परंपरा के अनुसार परमहंस परमानंद जी का शिष्य व आश्रम का संचालक एवं महंत विधिनुसार मैं हू तथा उसी समय मुझे यह जानकारी प्राप्त हुई की मृत्यु से कुछ पूर्व गुरु भाई बजरंग गिरी जी अपने कमरे से बगैर कपड़ों के चिल्लाते हुए बाहर निकले की सब कुछ खत्म हो गया।उपरोक्त परिस्थितियों से स्पष्ट है कि गुरुभाई की मृत्यु स्वाभाविक नही है एक षड्यंत्र के अंतर्गत हुई है।



















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