भोपाल। सियासत में दल बदलने और अपने नफा नुकसान के चलते वैचारिक तिलांजलि देना कोई नई बात नहीं है। जिस नेता को जहां सुविधा और महत्वकांछाएं पूरी होने की लालसा नजर आती है, वह वहीं बोरिया बिस्तर उठाकर चल देता है। ऐसा पिछले कुछ सालों से भाजपा और कांग्रेस के बीच जमकर चल रहा है। हाल फिलहाल तो कांग्रेस नेताओं की भाजपा में आने जैसे होड़ मची हुई हो, लाइन लगी हुई है। एक के बाद एक हर कद का कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल होने में लगा हुआ है।
ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों की मानें तो इनका कहना है कि कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली भाजपा दरअसल, खुद अपने नारे से ही भटक गई है और स्थिति यह हो रही है कि कांग्रेस मुक्त भारत की जगह कांग्रेस युक्त भाजपा होती जा रही है। यह बात अभी हाल ही में जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू के कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने के बाद पूर्व विधायक वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजय यादव ने भी एक इंटरव्यू के दौरान कही, उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का दुख नहीं है कि कौन कहां जा रहा है,ना ही कांग्रेस को किसी के जाने से झटका लग रहा है। दुख इस बात का लगता है कि जिस पार्टी ने सब कुछ दिया उसे ही अंत में धोखा देकर जाना यह ठीक नहीं है।
भाजपा के संदर्भ में संजय यादव ने कहा कि कांग्रेस युक्त बीजेपी हो रही है, यह भाजपा को खुद समझना चाहिए।
इनके अलावा राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यदि यही हालात रहे तो आने वाले समय में भाजपा के अंदर भी वैचारिक भिन्नता और खींचतान मचना स्वाभाविक रूप से सामने आएगी। भारतीय जनता पार्टी में पहले से जहां संघर्ष कर रही एक नई पीढ़ी की कमी नहीं है। वहीं बाहर से आए दलों के नए मेहमानों को भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कितना संभाल पाएगा और कितना संतुष्ट कर पाएगा यह भी एक बड़ा सवाल है। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो रहे हर कद के नेता अपनी कोई ना कोई महत्वाकांक्षा के साथ भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में भाजपा के अंदर ही पहले से संघर्ष कर रहे पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को यह नए मेहमान कितने सुहाते हैं पसंद आते हैं, यह भी भाजपा के लिए बड़े सवाल बने हुए हैं। इसके अलावा अपनी पुरानी विचारधारा को छोड़कर नई विचारधारा को अपनाने में कांग्रेसी कितने सहज हो पाते हैं,समन्वय भाजपा के साथ बैठता है या नहीं, या पार्टी के अंदर संक्रामक माहौल बनेगा ऐसे तमाम सवाल राजनीतिक गलियारों में दिलचस्पी रखने वालों के बीच चल रहे हैं।
कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं को सिंधिया की सलाह
कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए नेताओं को पूर्व कांग्रेस नेता और वर्तमान में भाजपा के वरिष्ठ नेता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक विशेष सलाह देते हुए कहा है कि उन्हें मेरे अनुभव से सीख लेनी चाहिए, सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस में रहकर उन्होंने स्वयं अनुभव किया था कि पार्टी के हालात क्या हैं। कभी-कभी दूसरों के अनुभव से भी सीख लेनी चाहिए। ददेर आए,पर दुरुस्त आए। मैं सच बता रहा हूं कि मैं खोज में था। मैं इसलिए खोज में था क्योंकि हम लोगों को भी अच्छे लोगों की जरूरत है। मेरा दिल का रिश्ता बनता है अगर अवसरों के आधार पर रिश्ता बना है तो पड़ोस में जाओ।
दिग्विजय खास सुमेर ने भी छोड़ी कांग्रेस, सिंधिया ने किया स्वागत
कांग्रेस से हर कद का नेता अपनी पार्टी और विचारधारा को छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहा है। यह बदलाव इन दिनों जमकर चर्चाओं में बना हुआ है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए गढ़ा राजघराने और दिग्विजय सिंह के पारिवारिक सदस्य सुमेर सिंह ने अपने समर्थकों के साथ अब भाजपा ज्वाइन कर ली है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इन्हें भाजपा का दुपट्टा पहनाकर पार्टी में इनका स्वागत किया। सुमेर सिंह अब दिग्विजय सिंह के नहीं बल्कि सिंधिया समर्थक कहलाएंगे। सुमेर सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद यह चर्चा है कि एक राजा को छोड़कर दूसरे राजा को सुमेर सिंह ने पकड़ लिया है।




















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