भोपाल। न्यूज डेस्क। मध्यप्रदेश की पहचान टाइगर स्टेट के रूप में है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस भी मनाया गया। मध्यप्रदेश के तमाम हुक्मरान इस बात पर गर्व करते हैं कि सबसे ज्यादा टाइगर मध्यप्रदेश की सरजमीं पर पाए जाते हैं। लेकिन इसके दूसरे पहलू पर नजर डालें कि यहां बाघों की सुरक्षा को लेकर घनघोर लापरवाही भी सामने आ रही है जिसका नतीजा यह है कि लापरवाही से सैकड़ों बाघों की अब तक मौत हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 2021 से मार्च 2024 के बीच 151 से अधिक बाघों की मौत हुई। बाघों की मौत के मामले में यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला साबित होता है। हालांकि सरकार और प्रशासन अब जाग गया है और इस दिशा में लगातार नजर बनाए हुए हैं। उधर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के जांच दल की जो रिपोर्ट जुलाई 2024 में आई है। इस पर वन विभाग से जवाब मांगा जा रहा है। उम्मीद है जल्द ही इतनी तादाद में बाघों की मौत अब आने वाले समय में थमेगी। और हमारे मध्यप्रदेश में बाघ की दहाड़ हमेशा की तरह गूंजती रहेगी।
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