साहित्य कला निर्देशन रंगमंच पत्रकारिता हर क्षेत्र में छोड़ी अमिट छाप
डिजिटल डेस्क न्यूज़। देश के सुविख्यात रंगकर्मी व थियेटर की दुनिया में एक अलग नाम जिसने अपने व्यवहार और कला निर्देशन से अमिट छाप छोड़ी, रंग कर्म और कला के क्षेत्र में कई शिष्य दिए। पत्रकारिता से लेकर वरिष्ठ रंगकर्मी तक का सफर तय करने वाले मध्यप्रदेश के ख्यातिलब्ध नाटककार,निर्देशक, लेखक और पत्रकार अरुण पांडे का निधन हो गया है। अब वे हमारे बीच नहीं रहे। यहां उल्लेखनीय है कि अपने जीवनकाल में कभी उन्होंने अपने शिष्यों और अनुयायियों से कहा था कि उनकी मृत्यु को किसी शोक सभा के रूप में नहीं, महोत्सव की तरह मनाया जाए। गुरु की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके सैकड़ों शिष्य, मित्र और प्रशंसक गौरी घाट पहुंचे और उनकी इस इच्छा को पूरा किया।
रविवार को शमशान घाट अलग नजर आया। यहां मातम नहीं, बल्कि एक मृत्यु महोत्सव मनाया जा रहा था। गुरु की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके सैकड़ों शिष्य, मित्र और प्रशंसक गौरीघाट पहुंचे और उन्हें विदाई देने के लिए न केवल आँसू बहाए बल्कि ढोल-नगाड़ों की धुन पर गाते हुए गुरु के अंतिम इच्छा पूर्ण करते हुए सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर कला जगत, साहित्य जगत, पत्रकारिता जगत की जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद रहीं। वहीं सुविख्यात चित्रकार पेंटर विनय अंबर ने कहा कि एक कलाकार को यह सच्ची श्रद्धांजलि है। मुंबई से आए फिल्म कलाकार नरोत्तम बेन ने कहा कि हमारे गुरु चले गए लेकिन उनकी शिक्षा हम सबको हमेशा याद रहेगी। संस्कारधानी में अरुण पांडे के चाहने वालों ने उन्हें हर पल याद किया और उनकी बातों की लगातार एक दूसरे से चर्चा करते रहे।




















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