अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की कीमतें करीब 20 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई
दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेलों में शामिल पाम ऑयल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़े उत्पादक इंडोनेशिया की बायोडीजल नीति और दक्षिण-पूर्व एशिया में सूखे मौसम व उत्पादन को लेकर बढ़ती आशंकाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की कीमतें करीब 20 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
इससे वैश्विक बाजार में तेजी का माहौल बन गया है। इसका सबसे बड़ा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है। इंडोनेशिया और मलयेशिया भारत के लिए पाम तेल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है और अपनी कुल जरूरत का करीब 60% हिस्सा विदेशों से मंगाता है। जुलाई 2026 में भारत का खाद्य तेल आयात 10 महीने के उच्च स्तर 14.8 लाख टन पर पहुंच गया, जिसमें अकेले पाम तेल का आयात करीब 7.31 लाख टन रहा। उत्पादन घटने या कीमतें बढ़ने का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ना तय है।
पाम तेल केवल रसोई तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग बिस्कुट, नमकीन, बेकरी उत्पादों, रेस्तरां उद्योग, साबुन, डिटर्जेंट, शैंपू, कॉस्मेटिक्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है।



















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