जो सीमाओं को लांघ रहे हैं उन्हें बताएं हम कौन हैं…?
Rakesh Mishra
असली नकली के चक्कर में जिस तरह की अमर्यादित भाषा का उपयोग मूर्ख लोग हमारे चार तीर्थ में से एक प्रमुख तीर्थ ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के लिए कर और कह रहें हैं। वह उचित और माफ़ी योग्य नहीं है, फर्जी शंकराचार्य आपदा में अवसर ना खोजें। हमारे हिंदुस्तान की विशाल सनातन संस्कृति और धार्मिक व्यवस्था को लेकर दुनियां में गलत संदेश जा रहा है।पीएम मोदी जी और मौजूदा भारत सरकार को इस पर आगे आकर स्वयं संज्ञान लेना चाहिए। क्योंकि उनकी सरकार में बैठ बड़े-बड़े मंत्री मिनिस्टर और प्रशासनिक अधिकारी खुद भी यह जानते हैं अपने अंतरमन से की कौन असली है और कौन नकली है…? और किस शंकराचार्य की क्या विशेषता है, और कौन किस परंपरा से है, लेकिन बावजूद इसके इनकी चुप्पियां भी गलत संदेश दे रही हैं, इन्हें भी आगे आकर अपनी बात मौजूदा सरकार से रखना चाहिए। आखिर किस बात का डर इन्हें सता रहा है। क्या यह लोग सिर्फ़ महराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त के करने के लिए आगे आगे होते थे आज कहां हैं,जब धर्म की हानि हो रही है। अनावश्यक प्रलाप हो रहा है। सीमाएं लांघी जा रही हैं।
यह बात सर्व विदित है,भारतवर्ष में की ब्रह्मलीन जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के अनन्य प्रिय शिष्य जो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को अपना उत्तराधिकारी समय रहते नियुक्त कर गए थे, इसके बाद ही पूर्ण सनातन विधि विधान से इन्हें ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित किया गया। इतने दिनों तक कोई विवाद नहीं हुआ, लेकिन अब चंद लोग जो शंकराचार्य बनने की लालसा, बीते दौर में महाराज श्री स्वरूपानंद जी के समय से मन में रखे रहे, वह फिर से आपदा में अवसर खोज रहे हैं। भारत के करोड़ों धर्मावलंबियों को भ्रमित कर रहे हैं। जबकि पूर्व में बड़े महाराज श्री जगतगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के रहते ही कानूनी तौर पर सब कुछ स्पष्ट हो चुका है उसके बावजूद अब बे-वजह यह प्रलाप किया जा रहा है।
मेरी इस बात से कौन-कौन सहमत है कमेंट में ज़रूर बताए। अपने दिल की बात रखने से पीछे ना हटें आगे बढ़े प्रभु श्री हरि आपके साथ हैं।
हर हर महादेव जय गुरुदेव



















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