महावीर जयंती पर बोले- पीएम:भगवान महावीर का शांति और सद्भावना का संदेश ‘विकसित भारत’ के निर्माण में देश के लिए प्रेरणा है
न्यूज़ डेस्क/नई दिल्ली। रविवार को महावीर जयंती के मौके पर दिल्ली के भारत मंडपम में पीएम ने कहा कि भगवान महावीर का शांति और सद्भावना का संदेश ‘विकसित भारत’ के निर्माण में देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कहा कि भारत मंडपम का ये भव्य भवन आज भगवान महावीर के 2,550वें निर्वाण महोत्सव के आरंभ का साक्षी बन रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि भगवान महावीर का ये 2,550वां निर्वाण महोत्सव हजारों वर्ष का एक दुर्लभ अवसर है। ऐसे मौके कई विशेष संयोगों को भी जोड़ते हैं। पीएम नो कहा कि यह वो समय है जब भारत अमृत काल के शुरुआती दौर में है। पीएम ने कहा कि भगवान महावीर के प्रति युवा पीढ़ी का ये आकर्षण और समर्पण, ये विश्वास पैदा करता है कि देश सही दिशा में जा रहा है।
आज दुनिया भारत से शांति की उम्मीद कर रही
पीएम मोदी ने कहा कि आज संघर्ष के बीच फंसी दुनिया भारत से शांति की उम्मीद कर रही है। नए भारत की इस नई भूमिका का श्रेय हमारी बढ़ती क्षमता और विदेश नीति को दिया जा रहा है। पीएम ने कहा कि इसमें देश की सांस्कृतिक छवि का बहुत बड़ा योगदान है। आज भारत इस भूमिका में आया है क्योंकि हम वैश्विक मंचों पर सत्य और अहिंसा को पूरे आत्मविश्वास के साथ सामने रखते हैं। संकट और संघर्ष भारत की प्राचीन संस्कृति, भारत की प्राचीन परंपरा में शामिल है।
पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव के कठिन समय में ऐसे पवित्र कार्यक्रम में शामिल होना उनके दिल और दिमाग को अत्यंत शांति दे रहा है, उन्होंने कहा कि भारत न केवल विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यता है, बल्कि मानवता का सुरक्षित ठिकाना भी है।
कविता के अंदाज में पीएम ने भारत की तारीफ़ की….
उन्होंने कहा कि…
ये भारत ही है, जो…
स्वयं के लिए नहीं, सर्वम के लिए सोचता है।
स्व की नहीं, सर्वस्व की भावना करता है।
अहम नहीं, वहम की सोचता है।
इति नहीं, अपरिमित में विश्वास करता है।
नीति और नियति की बात करता है।
पिंड में ब्रह्मांड की बात करता है।
विश्व में ब्रह्म की बात करता है।
जीव में शिव की बात करता है।
अमित काल का विचार सिर्फ एक बड़े संकल्प के बारे में नहीं है : पीएम
पीएम नो कहा कि देश के लिए अमृत काल का विचार सिर्फ एक बड़े संकल्प के बारे में नहीं है बल्कि यह हमें अमरता और शाश्वतता का एहसास कराने वाली भारत की आध्यात्मिक प्रेरणा भी है। यह हमारा दूरदर्शी दृष्टिकोण है, जो भारत को न केवल सबसे पुरानी जीवित सभ्यता बनाता है बल्कि मानवता के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल भी बनाता है।




















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