– राहुल गांधी 6 जून को बिहार के राजगीर में अति पिछड़ा सम्मेलन को करेंगे संबोधित
– राहुल गांधी की बिहार में लगातार सक्रियता, क्या कांग्रेस की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा
– बड़ा सवाल: कन्हैया कुमार हाशिये पर या मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी?
– बिहार में कन्हैया कुमार की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल
– कन्हैया की ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ पदयात्रा का क्या..?
डिजिटल डेस्क न्यूज़/पटना। बिहार का चुनाव भले ही अभी दूर हो, लेकिन यहां सियासी सरगर्मी लगभग शुरू हो चुकी है। एक तरफ लालू परिवार की जान तो वही है नीतीश और भाजपा की सक्रियता के साथ-साथ अब राहुल गांधी की बिहार में लगातार सक्रियता कांग्रेस की रणनीतिक तैयारी को प्रदर्शित करने लगी है। बिहार के राजनीतिक जानकारों की माने तो राहुल गांधी की बिहार को लेकर लगातार सक्रियता रणनीति का हिस्सा लग रहा है, जिसके तहत पार्टी अपनी खोई जमीन को वापस पाने की कोशिश कर रही है।
बिहार में कांग्रेस का प्रभाव 1989 के बाद से लगातार कम हुआ है, और 2020 के विधानसभा चुनाव में 70 सीटों पर लड़ने के बावजूद केवल 19 सीटें जीतने से महागठबंधन को नुकसान हुआ था। हालांकि इस बार, राहुल गांधी ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ और ‘शिक्षा न्याय संवाद’ जैसे अभियानों के जरिए युवाओं, दलितों, और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गत 7 अप्रैल को बेगूसराय में कन्हैया कुमार की ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ पदयात्रा में उनकी भागीदारी ने युवाओं में उत्साह पैदा किया, लेकिन RJD के साथ तनाव को भी उजागर किया।
राहुल गांधी की 6 जून 2025 को राजगीर में अति पिछड़ा सम्मेलन को संबोधित करने बिहार आ रहे हैं। राहुल गांधी ने बीते सभी बिहार दौरे के दौरान NDA की नीतीश सरकार को चुनौती देने का प्रयास किया है, लेकिन कांग्रेस के युवा नेता कन्हैया कुमार की भूमिका को लेकर बीते कई महीनों से सवाल उठ रहे हैं। क्या महागठबंधन की आंतरिक राजनीति एक बार फिर से कन्हैया कुमार को बिहार चुनाव से दूर कर रही है? या फिर नई रणनीति के चलते जिम्मेदारी देने कि तैयारी में है।




















Discussion about this post