Report- Manish Shriwastav
डिजिटल डेस्क न्यूज/जबलपुर। गर्मी ने जबरदस्त कहर बरपा रखा है। मई की तेज गर्मी ने इस बार मध्यप्रदेश में पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं। हालत यह है कि भोपाल और जबलपुर जैसे शहरों में सुबह 9 बजे ही तापमान 38 डिग्री तक पहुंच रहा है, जबकि दोपहर में पारा 44 से 45 डिग्री तक जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 50 साल में ऐसा क्या बदल गया कि शहर “हीट जोन” में बदलते जा रहे हैं?
करीब 50 साल पहले यानी 1970 के दशक में मई-जून में भोपाल और जबलपुर का तापमान सामान्यतः 36 से 38 डिग्री के बीच रहता था। सुबह का तापमान 28 से 30 डिग्री के आसपास होता था। शहरों में बड़े-बड़े पेड़, तालाब, खुली जमीन और हरियाली प्राकृतिक ठंडक बनाए रखते थे। रात में मौसम ठंडा हो जाता था।
लेकिन धीरे-धीरे शहरीकरण बढ़ा। सड़क चौड़ीकरण, फ्लाईओवर, कॉलोनियां, मॉल और कंक्रीट के विस्तार ने हरियाली कम कर दी। हजारों पेड़ काटे गए। तालाबों और जलस्रोतों पर अतिक्रमण बढ़ा। इसके साथ वाहनों, एसी और प्रदूषण का असर भी तेजी से बढ़ा।
विशेषज्ञों के अनुसार आज शहरों में “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव दिखाई दे रहा है। सीमेंट रोड, डामर और ऊंची इमारतें दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात में छोड़ती रहती हैं। यही कारण है कि अब रातों में भी गर्मी कम नहीं होती।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रुकी, जलस्रोतों को नहीं बचाया गया और कंक्रीट विस्तार को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच सकता है। इससे पानी का संकट, हीट स्ट्रोक और बिजली संकट जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ पौधे लगाने से नहीं, बल्कि पुराने बड़े पेड़ों को बचाने से ही शहरों को दोबारा ठंडक मिल सकती है।
MP के युवाओं बड़ी सौगात! एक साल के अंदर एक करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी
राज्य के मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट के फ़ैसलों के बारे में मीडिया को जानकारी दी और बताया कि युवाओं...




















Discussion about this post