मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में 21 प्रमुख कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि आम लोगों के काम समय-सीमा में पूरे हों
डिजिटल डेस्क/न्यूज़। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में 21 प्रमुख कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि आम लोगों के काम समय-सीमा में पूरे हों और कोशिश यह रहे कि शिकायत हेल्पलाइन तक पहुंचने की नौबत ही न आए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता से जुड़े प्राथमिक कामों का समय पर निराकरण प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान की समीक्षा करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि पिछले तीन सप्ताह में इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं।
कलेक्टरों को जानकारी पहले से देने के निर्देश दिए गए
अब अभियान के तहत होने वाले शिविरों और संवाद की अगले एक महीने की योजना पहले से तैयार की जाए। त्योहार या अन्य कारणों से यदि शुक्रवार को शिविर नहीं लग पाता है तो उसे अगले दिन शनिवार को आयोजित किया जाए। कलेक्टरों को भी शिविर की जानकारी पहले से देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम लोगों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था शुरू की जाएगी
सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों-कर्मचारियों की समय पर मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में बायोमेट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था शुरू की जाएगी। बाद में इसे प्रदेश के जिलों में भी लागू किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों को कर्मचारियों की उपस्थिति और काम की समय-सीमा पर निगरानी रखने को कहा गया है।
ग्रामीणों को मिलेगी जमीन की मुफ्त रजिस्ट्री
ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की जमीन की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए राजस्व और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी बनाई जाएगी। गांवों में दखलरहित जमीन का चिन्हांकन कर भूमिहीन परिवारों को आवास पट्टे देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे ग्रामीण परिवारों को जमीन का अधिकार मिलने के साथ बैंक से ऋण लेने में भी आसानी होगी।
पदोन्नति की प्रक्रिया सितंबर-अक्टूबर तक पूरी करें
बैठक में नर्मदा समग्र मिशन के गठन और क्रियान्वयन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया। इसका उद्देश्य नर्मदा को स्वच्छ और प्रवाहमान बनाए रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर काम करना है। शहरी क्षेत्रों में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निकायों को पानी की पर्याप्त उपलब्धता और सीवरेज व्यवस्था बेहतर बनाने के निर्देश दिए। इसके अलावा चित्रकूट, ओरछा, दतिया और उज्जैन जैसे धार्मिक स्थलों के विकास, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों, सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने और लंबित पदोन्नतियों की प्रक्रिया सितंबर-अक्टूबर में पूरी करने पर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए।



















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