– कच्चे तेल की कीमतें जनवरी के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं
– ईरान ओपेक का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश
– निफटी आई में 1% से ज्यादा की गिरावट
डिजिटल डेस्क न्यूज़/बिजनेस।
ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। बाजार में उथल-पुथल की स्थिति बन गई है। इसका असर सबसे पहले कच्चे दिल की कीमतों पर पड़ा है। बता दें कि कच्चे तेल की कीमतें जनवरी के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं हैं। ब्रेंट क्रूड 1.33 डॉलर (1.76%) बढ़कर 76.79 डॉलर प्रति बैरल हो गया। वहीं WTI में 1.39 डॉलर (1.88%) की तेजी आई और यह 75.26 डॉलर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान ब्रेंट 81.40 डॉलर और WTI 78.40 डॉलर तक पहुंच गए थे, जो पांच महीने का उच्चतम स्तर था।
ईरान ओपेक का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। ऐसे में कहीं होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया जा सकता है। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। ईरान के प्रेस टीवी के अनुसार ईरान की संसद ने इस जलडमरूमध्य को बंद करने का एक प्रस्ताव पारित किया है।
निवेशकों में डर का माहौल बना
उल्लेखनीय है कि अमेरिका के हमले के बाद निवेशकों में डर का माहौल देखा गया है। सुबह 9:40 बजे बीएसई सेंसेक्स 808 अंक यानी 0.98% गिरकर 81,599 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी50 इंडेक्स 217 अंक यानी 0.87% फिसलकर 24,895 पर आ गया। इस गिरावट से बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप शुरुआती कारोबार में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये घटकर 44.75 लाख करोड़ रुपये रह गया।
सेक्टरों में आई गिरावट
सेक्टरों की बात करें तो निफटी आई में 1% से ज्यादा की गिरावट आई। इसकी वजह यह है कि Accenture ने लगातार तीसरे साल आउटसोर्सिंग ऑर्डर्स में गिरावट दर्ज की है। इससे ग्लोबल टेक स्पेंडिंग को लेकर चिंता बढ़ गई है। निफ्टी बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.5% से 1% तक नीचे खुले।




















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