जानिए क्या है वह कहावत…?
पटना। बिहार में बहार है… नीतिशई कुमार है…इस तरह की कहावतें के दिन अब बिहार की सियासत में लगता है लद चुके हैं। वहीं इन दिनों बिहार की राजनीति में एक नया माहौल,एक नई हवा चल रही है।
दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीते कुछ सालों से कुछ इस तरह के बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं कि जिन्हें लेकर अब आम जनमानस में उनकी सियासी दाल गलते नहीं दिख रही है। राजनीतिक गलियारों में सियासत में दिलचस्पी रखने वालों की मानें तो नीतीश कुमार का हाल कुछ ऐसा हो गया है कि यदि उनके हाल के कुछ बयानों और कारनामों को याद करते हुए कहा जाए, तो एक कहावत उन पर चरितार्थ होती नजर आ रही है।
कहावत कुछ इस तरह है कि “राम ना मारे काहू को पापी नहीं हैं राम आप ही से मर जाएंगे कर कर खोटे काम”।
अब इस कहावत को यदि नीतीश कुमार के पूर्व में दिए गए कुछ बयानों और घटनाक्रमों से जोड़कर देखा जाए, तो यह बिल्कुल उन पर सटीक बैठती है, सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही के दिनों में बिहार विधानसभा के अंदर उन्होंने जिस तरह से अश्लीलता की पराकाष्ठा को ही पार कर दिया जिस पर बाद में उन्हें माफी भी मांगना पड़ी। इसके अलावा उनका सियासी उथल-पुथल तो जग जाहिर है ही कभी अपने लालू यादव परिवार से बनते बिगड़ते रिश्ते तो कभी एनडीए का दामन पकड़ते और छोड़ते दिखते हैं। यानी उनका बार-बार दल बदलने और पकड़ने का सिलसिला जिस तरह से जारी है, और जुबान पर लगाम न होना अब उनके व्यक्तित्व पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। इतना ही नहीं राजनीति के अखाड़े में बड़े-बड़े दांव- पेंच चलने वाले नीतीश कुमार की पोल भी खोलता है। एक समय रहा जब बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार काफी सुर्खियों में रहे और उन्हें सुशासन बाबू जैसे शब्दों से भी सम्मानित किया गया और लोग पहचानते रहे लेकिन अब हाल के दिनों में उनकी साख साथ काफी घटी है। जिसका असर आने वाले चुनावों में भी नजर आ सकता है। बहरहाल, चुनाव परिणाम क्या होंगे? यह तो फिलहाल कहा नहीं जा सकता, हां लेकिन राजनीति में चरित्र बहुत मायने रखता है। जिसे लेकर सियासत के बड़े जानकर काफी कुछ महत्वपूर्ण इशारे भी बिहार की राजनीति के परिप्रेक्ष्य में करते नजर आ रहे हैं।



















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