जबलपुर। जबलपुर कांग्रेस को बीच मझधार में छोड़, जिला अध्यक्ष जगत बहादुर सिंह अन्नू ने साहसिक कदम उठाते हुए कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। वर्तमान में जगत बहादुर सिंह कांग्रेस से महापौर भी हैं। ऐसे में इनके इस कदम को कई तरह से भी देखा जा रहा है,लेकिन सियासत में लाभ और हानि का गणित इन दिनों विचारधारा हो या तमाम नैतिक मूल्य सब की तिलांजलि रख लोग अपना सियासी नफा नुकसान पहले देख रहे हैं। ऐसे में यदि नगर अध्यक्ष और महापौर जैसी जिम्मेदारी कांग्रेस में शामिल रहा व्यक्तित्व अपनी पार्टी को छोड़ मजबूत दल से प्रभावित और आकर्षित हो जाए तो कोई नई बात नहीं है। यह भी चर्चा है कि पिछले दिनों भाजपा के कई मंचों पर जगत बहादुर जब पहुंचे तो उन्हें जिस तरह का मान सम्मान मिला उन्हें वह भी रिझा गया और वह अपने आप को संभाल नहीं पाए। जिसका परिणाम सबके सामने है कि अभी ज्यादा दिन भी नहीं गुजरे विधानसभा चुनाव की करारी हार को और लोकसभा चुनाव सामने है। ऐसे में जगत बहादुर ने अपनी बहादुरी दिखाते हुए पाला बदल लिया और अब वह कांग्रेसी की बजाय भाजपाई हो गए। भोपाल पहुंचकर बकायदा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और तमाम भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा का कमल छाप दुपट्टा भी पहन लिया है।
खुद के वार्ड से भी विधानसभा में नहीं दिला पाए थे बहादुर कांग्रेस को जीत-
विधानसभा चुनाव में जबलपुर की बुरी हालत केवल पूर्व विधानसभा को छोड़ दी जाए तो सारी सीट पर हार का सामना देखना पड़ा। इसके बाद हर वरिष्ठ और कनिष्ठ से भी नजरें नहीं मिला पाने की स्थिति जगत बहादुर सिंह अन्नू के सामने बन गई थी और उनके अध्यक्ष कार्यकाल को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी होना शुरू हो गई थी। पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोट की करारी हार में जिलाअध्यक्ष और महापौर रहते अपना वार्ड नरसिंह वार्ड भी नहीं जीता पाए थे बहादुर यह भी एक बड़ा सवाल उनके लिए बन गया था। यही सब भी एक बड़ी वजह चर्चाओं में सामने आ रही हैं। जिसका परिणाम आखिरकार पार्टी छोड़ने जैसा साहसिक कदम उठाने के रूप में सबके सामने है।




















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