– क्या नहीं हो रहा पार्टी के अंदर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ न्याय इसलिए हो रहा मोहभंग…?
– क्या कार्यकर्ता-पदाधिकारी अपने राजनीतिक भविष्य और महत्वाकांक्षाओं के चलते भी छोड़ रहे पार्टी…?
– या फिर कांग्रेस की जनमानस में घटती साख के चलते छोड़ रहे पार्टी…?
– क्या मौजूदा दौर में हिंदुत्व से अलग छवि बनने के कारण भी मजबूरी में छोड़ना पड़ रही पार्टी यह भी बड़ा सवाल…?
भोपाल/जबलपुर।कांग्रेस नेता राहुल गांधी भले ही पार्टी को खड़ा करने पूरा ज़ोर लगा रहे हैं। भारत जोड़ो यात्रा हो या अब न्याय यात्रा निकाल रहे हों, लेकिन असल में वे अपनी ही पार्टी को टूटने और बिखरने से बचा नहीं पा रहे हैं। इस में कोई संदेह नहीं है कि वे पूरी ताकत अपने स्तर पर लगा रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि आख़िर वे अपने लोगों को अपने कार्यकर्ताओं को समझ क्यों नहीं पा रहे। ऐसा क्या हो रहा है कि पार्टी में वर्षों तक काम करने के बाद पार्टी से मोहभंग हो रहा है। क्या पार्टी के अंदर ही कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों के साथ न्याय नहीं हो रहा है,जो जुड़ने की जगह टूट रहे हैं।
कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सवालों से घिरा
मौजूदा कांग्रेस पार्टी और खासतौर से राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने बड़ा सवाल है? वहीं पार्टी हाईकमान के बाकी वरिष्ठ नेता पहली पंक्ति के जयराम रमेश सरीखे क्या कर रहे हैं, बिखरती कांग्रेस को संवारने यह क्या कर रहे हैं। या केवल मौन चुप्पी से काम चला रहें हैं। क्या इन्हें भी इस बात का भय है कि कुछ ज्यादा दिमाग लगाया या दिया तो खुद पर संकट आ जायेगा। इससे बेहतर है चुप्पी साधे रहो। ना दिमाग लगाया जाए ना दिया जाए। ” वैसे भी कहावत है हुईए है वही जो राम रची राखा” क्या इस पर विचार कर मौन साध लिया है। वैसे भी इन दिनों श्री अयोध्या जी में श्री राम मंदिर में प्रभु श्री राम जी की प्रतिमा स्थापित होने के बाद हर तरफ राम-राम है। ऐसे में यह विचार रहा जाए तो कोई बुरा भी नहीं, बहुत सारे कांग्रेसियों का तो हृदय परिवर्तन भी कुछ इन्हीं वजहों से हो रहा है। यह अलग बात है कि वे कांग्रेस पार्टी में रहते हुए कई बार सार्वजनिक रूप से नहीं बोल पाते, लेकिन जब कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी या अन्य किसी दल में शामिल होते हैं तो यह जरूर कहते हैं कि वहां घुटन हो रही थी। बहरहाल, जो भी हो लेकिन देश की सबसे बुजुर्ग पार्टी लोकतंत्र के लिहाज़ से यदि विपक्ष में कमजोर हो तो सवाल उठना लाजिमी है। यह भी सर्वविदित है कि देश की सबसे बड़ी संसद में यदि सत्ता पक्ष के सामने विपक्ष मजबूत रहेगा तो यह लोकतंत्र की सेहत के लिए भी अच्छा होता है। परंतु इस पर क्या किया जा सकता है अब जनता जनार्दन है वह जनादेश जिसे ज्यादा दे- दे संसद के अंदर बोलबाला तो उसी का रहेगा। फिलहाल जिस तरह से देश का जनादेश भाजपा के पक्ष में है, वह एकतरफा माहौल बनाए हुए हैं,और विपक्ष धीरे-धीरे कमजोर होते हुए पतन की ओर जा रहा है। चुनावों में करारी हार के बाद भी कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गंभीर क्यों नहीं हो रहा और क्या कर रहा है? यह सवाल निरंतर बना हुआ है।
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ये हुए भाजपा में शामिल
कांग्रेस नेता अजय सिंह यादव, श्रीमती बाई साहब यादव, सुश्री एकता ठाकुर और सुजीत द्विवेदी भाजपा में हुए शामिल
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प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता ने दिलायी पार्टी की सदस्यता
भोपाल भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय में शनिवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश शासन के मंत्री राकेश सिंह, वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समक्ष पार्टी की रीति नीति से प्रभावित होकर अशोकनगर जिले के कांग्रेस नेता अजय सिंह यादव, उनकी माता श्रीमती बाई साहब यादव, जबलपुर जिले के सीहोरा विधानसभा की कांग्रेस प्रत्याशी रहीं जिला पंचायत सदस्य सुश्री एकता ठाकुर और कटनी के कांग्रेस नेता सुजीत द्विवेदी ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी नेताओं ने सभी का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। अजय सिंह यादव और उनकी माता श्रीमती बाई साहब यादव दोनों वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं। अजय सिंह यादव अशोकनगर मंडी के अध्यक्ष के साथ पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। कांग्रेस नेत्री, जिला पंचायत सदस्य सुश्री एकता ठाकुर विधानसभा चुनाव में जबलपुर जिले के सीहोरा विधानसभा से कांग्रेस की प्रत्याशी रही हैं। वहीं कटनी के सुजीत द्विवेदी कांग्रेस शिक्षा और विधि प्रकोष्ठ में भी पदाधिकारी रहे हैं। इस अवसर पर गुना सांसद केपी सिंह यादव, पूर्व मंत्री व विधायक संजय पाठक के साथ पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि व कार्यकर्ता उपस्थित थे।




















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