यह विभूषण श्री दुबे को कबीर जैसा जीवन जीने की ललक से प्रेरणा लेकर साहित्य, शिक्षा, संस्कृति एवं समाज के प्रति प्राणपण से सचेष्ट व समर्पित होने की प्रशस्ति में दिया गया।
-साहित्य सहोदर संस्था का आयोजन, व्यंग्य संग्रह तालियां बजाते रहो विमोचित
जबलपुर/न्यूज डेस्क। कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर, न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर…इन पंक्तियों के रचयिता कबीर कालजयी क्रांतिदृष्टा के रूप में स्मरण किए जाते हैं। उनकी देशना और चेतना का एक ही स्वर है-दुनिया में हूं, दुनिया का तलबगार नहीं हूं, बाजार से गुजरा हूं, खरीदार नहीं हूं। अतएव, कबीर की प्रासंगिकता उनके देशकाल से लेकर अब तक एक समान बनी हुई है और भविष्य में भी कायम रहेगी। इस आशय के उद्गार शनिवार को साहित्य सहोदर संस्था के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने रखे।इस अवसर पर नईदुनिया के सीनियर रिपोर्टर सुरेन्द्र दुबे को इस वर्ष के सुप्रतिष्ठित कबीर सम्मान से अलंकृत किया गया। यह विभूषण उन्हें कबीर जैसा जीवन जीने की ललक से प्रेरणा लेकर साहित्य, शिक्षा, संस्कृति एवं समाज के प्रति प्राणपण से सचेष्ट व समर्पित होने की प्रशस्ति में दिया गया। दूसरे चरण में संस्था के संस्थापक सुरेश मिश्र विचित्र के व्यंग्य संग्रह तालियां बजाते रहो का विमोचन हुआ।श्रीजानकीरमण महाविद्यालय, जबलपुर स्थित सभागार में साहित्यिक सास्कृतिक संस्था साहित्य सहोदर के इस गरिमामय कार्यक्रम में संत कबीर के प्राकट्योत्सव के उपलक्ष्य में उनके व्यक्तित्व-कृतित्व को रेखांकित किया गया। साथ ही कबीर के जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेने पर बल दिया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि शासी-निकायाध्यक्ष शरद भाई पालन रहे। अध्यक्षता महामहोपाध्याय प्रो. हरिशंकर दुबे ने की। विशिष्ट अतिथि बतौर राष्ट्रीय आल्हा अकादमी के अध्यक्ष भजनलाल महोबिया, लब्धप्रतिष्ठ व्यंग्यकार अभिमन्यु जैन, कथाकार व कवि प्रभात दुबे, समरसता सेवा संगठन के संदीप जैन मंचासीन थे।
डॉ. बैजनाथ गौतम सहित अन्य का हुआ सम्मान :
समाज के विविध क्षेत्रों में योगदान को देखते हुए डा. बैजनाथ गौतम, डा. एनपी. झारिया, धर्मेन्द्र शुक्ल, डा. गीता गीत, अरुण कटकवार, संतोष नेमा संतोष, शिवरतन पटेल को कबीर सम्मान-2024 से अलंकृत किया गया। इतिहासकार डा. आनंद सिंह राणा के संचालन में नाट्यलोक संस्था के कलाधर्मियों द्वारा कबीर स्वरांजलि की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। डा. उदयभानु तिवारी द्वारा विचित्र का काव्यात्मक परिचय प्रस्तुत किया गया। एक साहित्यिक पत्रक भी विमोचित हुआ, जिसमें साहित्य सहोदर संस्था की साहित्यिक गतिविधियों का विवरण दर्शाया गया। कार्यक्रम संयोजक प्राचार्य डा. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी द्वारा उपस्थित साहित्यकारों, कलाप्रेमियों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। दर्शनाचार्य डा. कौशल दुबे, डा. अरुणी पांडेय, निरंजन द्विवेदी, डॉp. शैलेन्द्र पांडेय, डा. अनामिका सिंह, दविंदर सिंह ग्रोवर, अनुराग तिवारी, गणेश प्रसाद प्यासा सहित अन्य की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।




















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