सेंट्रल जेल में कैदी बड़ी संख्या में छोटी से लेकर बड़ी मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें 300 छोटी मूर्तियां शामिल हैं।
जबलपुर/न्यूज डेस्क। मध्यप्रदेश के जबलपुर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस सेंट्रल जेल में चार दिवारी में बंद कैदी इको फ्रेंडली गणेश की मूर्ति बना रहे हैं।हालांकि, इन कैदियों का वक्त खराब था, जिसके कारण जेल में सजा काट रहे हैं, लेकिन काबिलियत में कोई भी कमी नहीं है। इसी काबिलियत को देखते हुए जेल प्रशासन ने 10 कैदियों की टीम बनाई और अब कैदी मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं।
सेंट्रल जेल में कैदी बड़ी संख्या में छोटी से लेकर बड़ी मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें 300 छोटी मूर्तियां शामिल हैं।
इनमें तीन बड़ी मूर्तियां भी हैं, जिनमें से दो सेंट्रल जेल में ही रखी जाएंगी। एक बड़ी मूर्ति जज कॉलोनी रांझी के ऑर्डर से बन रही है।मूर्ति बना रहे कैदी ने बताया कि वह 3 साल से सजा काट रहा है। जेल प्रशासन ने 300 गणेश मूर्ति का टारगेट दिया है। मूर्तियों को इको फ्रेंडली बनाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान न हो।
जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर का कहना है कि गणेश मूर्ति में जेल की मिट्टी, तुलसी, लकड़ी, चारे और गोबर का उपयोग किया जा रहा है। वहीं, चौक मिट्टी को मार्केट से लाया जाता है। कलर ईको फ्रेंडली होते हैं, क्योंकि मूर्ति को मां नर्मदा में विसर्जित किया जाता है, इसलिए सारी मूर्तियां इको फ्रेंडली बनाई जा रही हैं।इससे पर्यावरण को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा। आगे बताया कि जेल में बंद कैदी मूर्ति ही नहीं दीपक, कपड़े से लेकर अन्य वस्तुएं भी जेल परिसर के अंदर बनाते हैं।मूर्तियों का निर्माण कुशल बंदियों के द्वारा किया जाता है।
#नेताजीसुभाषचंद्रबोसकेंद्रीयजेल#सेंट्रलजेलजबलपुर#एमपीन्यूज#happyganeshji




















Discussion about this post