नई बहस का मुद्दा बना,सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं
विवाद की शुरुआत एक सरकारी कार्यक्रम से हुई जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकारी डॉक्टर बने अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांट रहे थे।
डिजिटल डेस्क न्यूज़/बिहार/पटना। देश में और बिहार की राजनीति में इन दिनों ‘हिजाब’ चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब तो ये मामला इंटरनेशनल हो चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक महिला डॉक्टर से उसका हिजाब उतारने को कहा, या यूं कहें कि उन्होंने उतार दिया। इसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
ये विवाद उस समय गहरा गया, जब विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सरकारी संस्थानों के ड्रेस कोड और धर्मनिरपेक्षता के चश्मे से देखना शुरू किया।
हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय या प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पाबंदी की बात नहीं कही गई है और ना ही इस घटना पर कोई बयान जारी किया गया है। लेकिन, सार्वजनिक मंच पर इस दृश्य ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या शैक्षणिक और सरकारी कार्यक्रमों में धार्मिक प्रतीकों की अनुमति होनी चाहिए?
जानिए, क्या है नीतीश कुमार से जुड़ा हिजाब विवाद?
विवाद की शुरुआत एक सरकारी कार्यक्रम से हुई जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकारी डॉक्टर बने अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांट रहे थे। इस दौरान एक मुस्लिम लड़की भी हिजाब पहने नियुक्ति पत्र लेने आई। उसको अपॉइंटमेंट लेटर देते समय सीएम ने उसके चेहरे ढंके देखर कहा कि ये क्या है? फिर चेहरे से उसका हिजाब हटा दिया। वायरल वीडियो और तस्वीरों के बाद यह सवाल उठा कि क्या हिजाब पहनना नियमों के अनुकूल है? एनडीए के नेता नीतीश कुमार का लगातार बचाव कर रहे हैं। वहीं, आलोचकों ने इसे धर्म और संस्कृति से जोड़ दिया है। बिहार में ये मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि कर्नाटक में हिजाब को लेकर पहले ही लंबा कानूनी विवाद चल चुका है।
जानिए, मुस्लिम लड़कियां क्यों पहनती हैं हिजाब?
अब सवाल है कि आखिर मुस्लिम लड़किया हिजाब क्यों पहनी हैं? इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, हिजाब केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि ‘हया’ (शालीनता) और शुचिता का प्रतीक है। कई मुस्लिम लड़कियां इसे अपनी धार्मिक पहचान और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के तरीके के रूप में देखती हैं। आधुनिक संदर्भ में, कई युवतियों के लिए ये अपनी पसंद की स्वतंत्रता का भी मामला है। उनका तर्क है कि जिस तरह अन्य धर्मों के लोग अपने धार्मिक चिन्ह (जैसे पगड़ी या तिलक) धारण करते हैं, उसी तरह हिजाब पहनना उनका संवैधानिक अधिकार है।
जानिए, क्या है हिजाब की इस्लामिक परंपरा..?
इस्लामी शरीयत और कुरान के संदर्भों के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए शालीन पहनावे के निर्देश दिए गए हैं।
‘हिजाब’ शब्द का अर्थ है ‘पर्दा’ या ‘रुकावट’। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, इसका उद्देश्य महिलाओं को समाज में एक गरिमामयी पहचान देना और उन्हें बाहरी बुरी नजरों से सुरक्षित रखना है। अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में इसके स्वरूप बदलते रहते हैं, जैसे भारत में इसे अक्सर दुपट्टे या स्कार्फ के रूप में सिर ढंकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से, ये परंपरा सदियों पुरानी है और मुस्लिम समाज के सामाजिक ढांचे का एक अभिन्न हिस्सा रही है।




















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