जनसुराज बिहार चुनाव में बुरी तरह हारी, चिंतन, मनन समीक्षा
बड़ा सवाल, आखिर रणनीतिकार पीके से कहां हो गई चूक
डिजिटल डेस्क न्यूज़/पटना। बिहार विधानसभा का चुनाव समाप्त हो चुका है। चुनावी नतीजों ने सबको चौंका दिया है। एनडीए को 202 सीटों पर जीत मिली है। जबकि महागठबंधन 35 सीट पर ही सिमट कर रह गई है। वहीं, राजनीतिक दलों और क्षत्रपों की चुनावी सफलताओं की पटकथा लिखने वाले प्रशांत किशोर को करारी हार का सामना करना पड़ा है। चुनावी नतीजों में जन सुराज पार्टी को निराशा हाथ लगी और एक भी सीट जीतने में विफल रही।
दरअसल, प्रशांत किशोर को कई राजनीतिक दलों की चुनावी सफलता का श्रेय दिया जाता रहा है। लेकिन उनकी बहुप्रतीक्षित पटकथा एक जबरदस्त असफलता साबित हुई है। तीन साल पहले जब उन्होंने चंपारण से पदयात्रा के साथ बिहार में अपनी जनसम्पर्क यात्रा शुरू की थी, तो वे अपने संवाद कौशल के कारण सुर्खियों में छाए रहे थे।
लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की सुनामी से उड़ी धूल के जमने के साथ ही, प्रशांत किशोर और उनकी महत्वाकांक्षाएं दफन हो गई हैं। उन्होंने दावा किया था कि नीतीश, जिनकी पार्टी में वे 2018 में बड़े जोर-शोर से शामिल हुए थे और 2020 में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम का समर्थन करने पर सार्वजनिक रूप से उनका अपमान करने के कारण निष्कासित कर दिए गए थे, अगले मुख्यमंत्री नहीं होंगे और उनकी पार्टी, जेडीयू, 25 से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो वे राजनीति छोड़ देंगे। राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर अब प्रशांत किशोर की चमक फीकी पड़ गई है।




















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