-इजरायल और ईरान के बीच तीव्र होते हमले से बढ़े खतरे
-दुनिया में अनिश्चिंतता एवं भय का माहौल व्याप्त
-तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका ने समूची दुनिया को किया भयभीत
ईरान ने परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल कर ली है, जो चिंताजनक
डिजिटल डेस्क न्यूज़।
इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को आज 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। युद्ध को समाप्त करने रोकने के लिए दुनिया के तमाम देश के हुक्मरान शांति की बात कर रहे हैं, लेकिन युद्ध थमने की बजाए युद्ध के खतरे बढ़ते ही जा रहे हैं। अब तक के करीब नौ दिनों के युद्ध में ईरान और इजरायल में सैकड़ों की संख्या में मौत, हजारों घायल, अरबों का नुकसान, दुनिया में अनिश्चिंतता एवं भय का माहौल व्याप्त है, तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका ने समूची दुनिया को भयभीत कर रखा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचा है, लेकिन नष्ट नहीं किया गया है। अमेरिका और इजराइल का मानना है कि ईरान ने परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल कर ली है और अगर अब उसे नहीं रोका गया, तो खतरा पूरी दुनिया को होगा। इजराइल इसी खतरे को मिटाने की बात कहकर ईरान पर तीव्र से तीव्रत्तर हमले कर रहा है और ईरान भी जबावी हमलों में इजरायल में तबाही मचा रखी है। युद्ध भले ही इन दो देशों के बीच हो रहा है, लेकिन उसका प्रभाव समूची दुनिया पर हो रहा है। इस संघर्ष को रोकना आवश्यक है। इस युद्ध को रोकने के लिये बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।
इजरायल चाहता है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो और अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन का अंत हो। हालांकि इस बात की गारंटी डोनाल्ड ट्रंप या नेतन्याहू में से कोई नहीं ले सकता कि खामेनेई को हटाने से समस्या का समाधान हो जाएगा।
यह कैसे कहा जा सकता है कि नई सत्ता को परमाणु ताकत बनने में कोई दिलचस्पी नहीं होगी, वह भी जब उसके पास अमेरिका और इजरायल के हिसाब से जरूरी साधन मौजूद हैं। इन हवाई हमलों से या जमीन पर सीधी लड़ाई लड़कर भले ही ईरान के इन्फ्रास्ट्रक्चर को खत्म कर दिया जाये, लेकिन ईरान के उस तकनीकी ज्ञान को कैसे खत्म किया जा सकता है, जो ईरानी वैज्ञानिकों ने वर्षों की मेहनत से हासिल की है। ऐसे में विदेशी दबाव में हुआ बदलाव ईरान को और ज्यादा कट्टरता की ओर ही ले जायेगा। ऐसे में अमेरिका या इजराइल के हमलों से ईरान में आमूल-चूल परिवर्तन होना संभव प्रतीत नहीं होता।




















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