-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब राजनीतिक विवाद
-मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि उसे चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे।
-शुजालपुर से शुरू हुआ राजनीतिक विवाद
डिजिटल डेस्क न्यूज/ भोपाल।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच शुरू हुई बयानबाजी मध्य प्रदेश की राजनीति में अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेती दिखाई दे रही है। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से विरोध करने की अपील की है।
शाजापुर जिले के शुजालपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों तक का विरोध किया जा रहा है।
इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस संगठन और नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर तीखी टिप्पणी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि उसे चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे।
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी
मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। प्रदेश के कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।
जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की
विवाद बढ़ने के बाद जीतू पटवारी ने वीडियो संदेश जारी कर पार्टी कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा गांधीवादी है और पुतला दहन या उग्र प्रदर्शन पार्टी की संस्कृति का हिस्सा नहीं है।
पटवारी ने कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का आग्रह करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को फूल और माला देकर प्रतीकात्मक विरोध किया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद की गरिमा का सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस किसानों, युवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी, लेकिन इसका जवाब हिंसा और आक्रोश से नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लड़ाई विचारों के स्तर पर लड़ी जानी चाहिए और घृणा का जवाब घृणा नहीं हो सकता।




















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