पूर्व जजों ने चुनाव आयोग और सरकारी संस्थाओं के समर्थन में खुला पत्र जारी किया। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों और देश को अस्थिर करने के संभावित खतरों को लेकर चेतावनी दी।
हाल ही में जब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि SIR और चुनाव से जुड़े कई मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही मतभेद हैं तो विपक्षी दलों को अपने दावे के सपोर्ट में फैक्ट मिल गए।
डिजिटल डेस्क न्यूज़/ नई दिल्ली। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल बीते कई सालों से मोदी सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं। इनका कहना है कि कभी EVM में गड़बड़ी कर तो कभी चुनाव आयोग के जरिए विपक्षी दलों पर सख्ती के जरिए देशभर में BJP को जिताया जा रहा है। 42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग और सरकारी संस्थाओं के समर्थन में खुला पत्र जारी किया। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों और देश को अस्थिर करने के संभावित खतरों को लेकर चेतावनी दी।
पूर्व जजों ने सरकारी संस्थाओं को कमजोर दिखाने को लेकर चेतावनी दी है। यह लेटर ऐसे समय में आया है, जब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और वोटर लिस्ट में संशोधन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहा है।


लेटर में पूर्व जजों ने तर्क दिया कि ऐसी कोशिशों से लोगों का भरोसा कम होगा और जब वोट का कोई मतलब नहीं रह जाएगा, तो सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन का महत्व बढ़ जाएगा। पत्र में आगे कहा गया है- अशांति की शुरुआत एक नैरेटिव से होती है। इसके बाद अराजक तत्व उस खाली जगह पर कब्जा कर लेते हैं। इनमें से कुछ तो देश के भीतर के ही होते हैं, जबकि कुछ को बॉर्डर पार से शह देते हैं। हम लिख रहे हैं क्योंकि इस समय चुप रहना न्यूट्रल विकल्प नहीं है। हमारी चिंता गंभीर है। भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हमले हो रहे हैं।
पत्र में लिखा है- भारत का चुनाव आयोग इस हमले के केंद्र में है। यहां तक कि न्यायपालिका, जिसका हम बहुत सम्मान करते हैं, और एजेंसियों को भी नहीं छोड़ा गया है। यह हमले सोची समझी आलोचना नहीं है, यह राजनीति से प्रेरित एक सोचा-समझा कैम्पेन लगता है, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अस्थिर करने के संभावित विनाशकारी नतीजों की परवाह नहीं की गई है।
पत्र में लिखा है- वोट चोरी के आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए जाते हैं, न कि कोर्ट में। जब आयोग शपथ-पत्र मांगता है, तो कोई शपथ-पत्र दाखिल नहीं किया जाता। हार के बाद ही EVM को दोषी ठहराया जाता है। उन्हीं मशीनों से मिली जीत पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता। जो पार्टी 5 दशकों से ज्यादा समय तक देश पर शासन करती रही, वही अब दावा कर रही है कि जिस सिस्टम ने उसे चुना, उसी में धांधली हुई है।




















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