डिजिटल डेस्क न्यूज़। शारदीय नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 11 अक्टूबर (रविवार) से हो रहा है। इस बार नवमी व्रत 19 अक्टूबर को होगा। इसका पारण और नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर को होगा। यानी दशहरा या विजयादशमी 20 अक्टूबर को होगी।
पहले बात नवरात्रि की… तो आइए जानते हैं कि इस साल कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है, पूजा सामग्री क्या होनी चाहिए और किस दिन देवी के किस रूप की पूजा होगी।
कलश स्थापना
11 अक्टूबर (रविवार) को सुबह 6 बजकर 32 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसी समय में आप कलश स्थापना करके नवरात्र की पूजा शुरू कर सकते हैं। हालांकि अगर किसी कारण से आप इस समय कलश स्थापना नहीं कर पाए, तो आप उसी दिन 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक भी कलश स्थापित कर सकते हैं।
पूजा सामग्री की लिस्ट
पूजा की तैयारी के लिए सभी सामान एक दिन पहले ही जुटा लें, ताकि सुबह किसी तरह की परेशानी न हो।
- कलश
- पूजा की थाली
- मिट्टी
- साफ बगीचे की मिट्टी
- जौ
- साफ नल का पानी
- गंगाजल
- आम या अशोक के पत्ते
- साबुत नारियल
- सिक्का
- सुपारी
- थोड़े से अक्षत (चावल)
- हल्दी-कुमकुम
- लाल मौली या कलावा
- लाल कपड़ा
- लाल फूल, जैसे गुड़हल
- भोग के लिए ताजे फल और मिठाई
- अखंड ज्योत के लिए शुद्ध गाय का घी या तिल का तेल और रुई की बत्ती
- अगरबत्ती या धूप और कपूर
कलश स्थापना कैसे करें
जगह की सफाई करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। फिर एक छोटी चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की तस्वीर रखें।
जौ बोएं
एक छोटी मिट्टी की थाली में साफ मिट्टी की परत बिछाएं। इसके ऊपर जौ के बीज समान रूप से डालें और ऊपर से थोड़ी मिट्टी डाल दें। फिर थोड़ा पानी छिड़कें।
कलश तैयार करें
कलश में साफ पानी और कुछ बूंदें गंगाजल की डालें। इसमें एक सिक्का, सुपारी, कुछ अक्षत और थोड़ा कुमकुम डालें। कलश के चारों ओर लाल मौली या कलावा बांधें।
पत्ते और नारियल रखें
कलश के मुंह पर पांच आम या अशोक के पत्ते रखें। साबुत नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटें और उस पर मौली बांधें। इसके बाद नारियल को पत्तों के बीच कलश के ऊपर रखें।
कलश की स्थापना करें
तैयार कलश को दोनों हाथों से उठाकर जौ वाली मिट्टी के बीच रखें।
दीपक जलाकर पूजा करें
कलश के पास घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। मां दुर्गा को ताजे फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं। अंत में कपूर से आरती करें।




















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