मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए 8 जंगली भैंसों को बाड़े में छोड़ा।
प्रदेश में विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को फिर से बसाकर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
तीन साल में 50 भैंसों को बसाने की योजना
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डिजिटल डेस्क न्यूज़/भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब सौ साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर क्षेत्र में बने बड़े बाड़े में छोड़ा। अब तक इन्हें एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े में रखकर स्थानीय वातावरण और जलवायु के अनुकूल बनाया जा रहा था। अगले तीन वर्षों में सूपखार क्षेत्र में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य रखा गया है।
जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया था। पहले चरण में 28 अप्रैल को तीन मादा और एक नर भैंसे को छोटे बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद 9 मई को तीन मादा और एक नर भैंसे को वहां रखा गया। संगरोध (क्वारंटाइन) अवधि पूरी होने के बाद 11 अक्टूबर को सभी आठ भैंसों को बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि करीब सौ वर्षों बाद कान्हा के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना परियोजना का दूसरा चरण शुरू हुआ है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से करीब 2,200 किलोमीटर की दूरी तय कर इन भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।
मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों में जंगली भैंसों की मौजूदगी करीब सौ साल पहले समाप्त हो गई थी। सूपखार क्षेत्र में पहले इनकी मौजूदगी के प्रमाण मिलने के आधार पर वन विभाग ने यहां पुनर्स्थापना परियोजना शुरू की है। इसके तहत अगले तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य रखा गया है। बड़े बाड़े में स्थानांतरण को इसी दिशा में अगला चरण माना जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में फिर से बसाना है।
पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को फिर से बसाकर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने नौरादेही में चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल का भी उल्लेख किया।




















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