– बुधवार 25 जून को आपातकाल यानी इमरजेंसी के 50 साल पूरे हो गए
– शाह ने कहा, “देशवासियों ने ‘सिंहासन खाली करो’ का शंखनाद किया और तानाशाह कांग्रेस को उखाड़ फेंका
पिछले साल शाह ने घोषणा की थी कि मोदी सरकार 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाएगी
इस वर्ष मनाया 25 जून को संविधान हत्या दिवस
डिजिटल डेस्क न्यूज़।
भारत में आपातकाल के 1975 से 1977 तक 21 महीने के कालखंड को बुरा दौर कहा जाता है। बुधवार 25 जून को आपातकाल यानी इमरजेंसी के 50 साल पूरे हो गए। इस अवसर पर देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि आपातकाल कोई राष्ट्रीय आवश्यकता नहीं, बल्कि कांग्रेस और एक व्यक्ति की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का परिचायक था।
शाह ने यह बात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के संदर्भ में कही। इंदिरा गांधी सरकार ने 25 जून 1975 को आपातकाल लागू किया था। आपातकाल के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए शाह ने कहा कि यह दिन सभी को याद दिलाता है कि जब सत्ता तानाशाही बन जाती है, तो जनता उसे उखाड़ फेंकने की ताकत रखती है। हालांकि देशभर में इसे लेकर भाजपा के द्वारा संविधान हत्या दिवस मनाया गया और तमाम लोगों ने इस पर अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं दी।
बता दें कि आगे गृह मंत्री ने कहा कि ‘आपातकाल’ कांग्रेस की सत्ता की भूख का ‘अन्यायकाल’ था। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान देशवासियों ने जो पीड़ा और यातना सही, उसे नयी पीढ़ी जान सके, इसी उद्देश्य से मोदी सरकार ने इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ का नाम दिया।
गृहमंत्री शाह ने अपने एक्स पर भी लिखा
शाह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “आपातकाल कोई राष्ट्रीय आवश्यकता नहीं, बल्कि कांग्रेस और एक व्यक्ति की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का परिचायक था।” उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता कुचली गई, न्यायपालिका के हाथ बांध दिए गए और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया।
शाह ने कहा, “देशवासियों ने ‘सिंहासन खाली करो’ का शंखनाद किया और तानाशाह कांग्रेस को उखाड़ फेंका।
इस संघर्ष में बलिदान देने वाले सभी वीरों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।” पिछले साल शाह ने घोषणा की थी कि मोदी सरकार 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाएगी, ताकि इस अवधि के दौरान अमानवीय पीड़ा सहने वालों के बड़े योगदान को याद किया जा सके।




















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