इस आशय के गंभीर आरोप आरटीआई एक्टिविस्ट गोपाल हूंका और सोशल वर्कर श्री सुबोध रिछारिया ने मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन भोपाल को भेजी शिकायत में लगाए हैं।
जबलपुर/न्यूज डेस्क। संस्कारधानी जबलपुर के मशहूर डॉ. संजय मिश्रा (सीएमएचओ) को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। शहर के आरटीआई एक्टिविस्ट ने किया है। जानकारी के अनुसार शहर के बंदरिया तिराहे स्थित सबसे ऊंची ओजस इम्पीरिया बिल्डिंग में एक बेशकीमती फ्लैट की मालकिन इप्शिता सिंह मिश्रा हैं। वे कभी जबलपुर के सीएमएचओ डॉ.संजय मिश्रा की शिष्या थीं और फिर उनकी दूसरी पत्नी बन गईं। फ्लैट क्रय के दस्तावेज इसकी गवाही दे रहे हैं। उनमें संलग्न आधार कार्ड की प्रति से साफ है कि इप्शिता और डा. मिश्रा दम्पति हैं। दरअसल, डॉ. संजय मिश्रा ने अपने ताऊ की पुत्री यानि अपनी चचेरी बहन से शादी रचाने के बाद अपनी स्टूडेंट को दूसरी बीवी बनाया है। अनेक वर्षों तक अवैध रूप से पैथोलाजी सेंटरों का संचालन कर शासन की अनुमति के बिना उसके लिए करोड़ों का आलीशान फ्लेट खरीद लिया। इसके बावजूद एक पैथोलॉजी संचालक को सजा के बजाय शासन ने क्षेत्रीय संचालक और सीएमएचओ जैसे दो- दो पदों से नवाज दिया। यादव कॉलोनी में पहली पत्नी तृप्ति और ओजस इम्पीरिया में दूसरी पत्नी इप्शिता के मकानों का आर्थिक आकलन हो तो लोकायुक्त व ईओडब्ल्यू का केस बनना तय है।
शासन की अनुमति के बगैर गैरकानूनी तरीके से दूसरी शादी करने के बाद अनेक वर्षों तक शासन की बिना अनुमति के जबलपुर में अवैध रूप से अनेक पैथोलाजी सेंटरों का संचालन करने और उसकी आय से शासन की बिना अनुमति के अपनी दूसरी पत्नि के लिए आलीशान फ्लेट खरीदने वाले क्षेत्रीय संचालक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग जबलपुर के पद पर पदस्थ और प्रभारी सीएमएचओ डॉक्टर संजय मिश्रा को शासन से धोखाधड़ी करने पर राजधानी भोपाल में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पुरस्कृत कर दो-दो पदों से नवाजा गया है। जो जनचर्चा का विषय बना हुआ है।
इस आशय के गंभीर आरोप आरटीआई एक्टिविस्ट गोपाल हूंका और सोशल वर्कर श्री सुबोध रिछारिया ने मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन भोपाल को भेजी शिकायत में लगाए हैं। जिसके अनुसार डॉक्टर संजय मिश्रा की पहली पत्नी का नाम तृप्ति मिश्रा है। जिनसे उनकी एक पुत्री जान्हवी मिश्रा है। इस तथ्य की पुष्टि डॉक्टर संजय मिश्रा की समग्र आई डी और सेवा पुस्तिका से हो जाती है। तृप्ति मिश्रा उनके बड़े पिताजी यानी ताऊजी की पुत्री अर्थात संजय की चचेरी बहन होने से उक्त विवाह अशोभनीय कृत्य की श्रेणी में आता है। संजय मिश्रा की दूसरी पत्नी का नाम इप्शिता सिंह मिश्रा है। जिनसे एक पुत्र भी है और इस तथ्य की पुष्टि इप्शिता सिंह मिश्रा के आधार कार्ड से हो जाती है। जिसमें उनके पति का नाम डॉक्टर संजय मिश्रा दर्ज है। जानकारी के अनुसार इप्शिता मिश्रा उनकी पूर्व स्टूडेंट हैं और उनसे 23 साल छोटी हैं। इस गैरकानूनी रिश्ते से उनका एक पुत्र भी है।
शिकायत में कहा गया है कि मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 22 में शासकीय अधिकारी को दो विवाह करने का निषेध किया गया है। घोर आश्चर्य का विषय है कि इतने बड़े पद पर रहते हुए दो – दो पत्नियां रखना गंभीर कदाचरण है लेकिन शासन के द्वारा दो विवाह करने की कोई सजा देने के स्थान पर पुरूषकारस्वरूप उन्हें दो पदों से नवाजा गया है।
श्री हूंका ने कहा है कि कल्याणिका प्रमोटर एंड डेवलपर्स ने रामपुर जबलपुर में एक बहुमंजिला इमारत ओजस इंपीरिया का निर्माण किया है। इसी इमारत के टावर सी में डॉक्टर संजय मिश्रा एवं डॉक्टर इप्शिता सिंह मिश्रा ने संयुक्त रूप से एक फ्लैट खरीदा है, जिसका नंबर 1201 है। जिसमें डॉक्टर इप्शिता सिंह मिश्रा निवासरत हैं। कथन के प्रमाणीकरण के लिए फ्लैट के पंजीकृत विक्रय पत्र दिनांक 22 जुलाई 2021 की प्रति शिकायत में सलग्न की गई है। उक्त संपत्ति आचरण नियम 19 के विपरीत बिना शासन की अनुमति के क्रय की गई है।
इस प्रकार जहां समग्र आई डी व सेवा पुस्तिका में डॉक्टर संजय मिश्रा के परिवार के रूप में पत्नी तृप्ति मिश्रा और पुत्री जान्हवी मिश्रा का नाम दर्ज है वहीं दूसरी ओर इनके फ्लैट की रजिस्ट्री, आधार कार्ड, नामांतरण व खसरे संबंधी प्रमाणित दस्तावेजों में इनके दूसरे परिवार के रूप में गैरकानूनी पत्नी इप्शिता सिंह मिश्रा पति डॉक्टर संजय मिश्रा दर्ज है। जिसमें इनकी दूसरी पत्नी और खुद इनके संयुक्त दस्तखत के साथ दोनो के फोटो भी संलग्न हैं। सूत्रों से पता चला है कि डॉ संजय मिश्रा की लेडी एल्गिन अस्पताल में बतौर पैथोलाजिस्ट पदस्थापना हुई थी। इस दौरान उन्होंने शासन की अनुमति के बिना ही नियम विरूद्ध जबलपुर में अनेक वर्षों तक अवैध रूप से फैथ पैथोलाजी आदि पैथोलाजी सेंटरों व प्रायवेट अस्पतालों में पैथोलाजी लेवों में काम किया और कोचिंग क्लास में पढ़ाने का कार्य भी किया था। एक ओर जहां उन्होंने उसकी आय से न केवल अपनी दूसरी पत्नि के लिए आलीशान फ्लेट खरीदा बल्कि शासन से नियम विरूद्ध नान प्रेक्टिसिंग एलायंस भी प्राप्त किया। जो कि भृष्टाचार का जीवंत प्रमाण है। अतः उक्त संपत्ति शासन द्वारा जप्त करने योग्य है।




















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