कोर्ट ने केजरीवाल को 2 जून को फिर समर्पण करने का आदेश दिया है
नई दिल्ली/न्यूज डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका के लंबित रहने के दौरान ही चुनावों के देखते हुए 10 मई को केजरीवाल को एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी दी थी। कोर्ट ने केजरीवाल को 2 जून को फिर समर्पण करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ कर रही है। गुरुवार को ईडी की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि ईडी के पास केजरीवाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। केजरीवाल ने 100 करोड़ रुपये रिश्वत मांगी थी और इसके परिणाम स्वरूप पैसा आया और आम आदमी पार्टी ने गोवा चुनाव में उसका इस्तेमाल किया।
इस मामले में आम आदमी पार्टी को अभियुक्त बनाया जाएगा। ईडी के पास प्रत्यक्ष सबूत हैं कि केजरीवाल गोवा में सात सितारा होटल में रुके थे जिसके भुगतान का कुछ हिस्सा दिल्ली के जनरल एडमिनिस्ट्रेटिव विभाग ने किया और कुछ हिस्से का भुगतान चनप्रीत सिंह ने किया जिसके पास पैसा आया था। एसवी राजू ने कहा कि ये लोग जांच में सहयोग नहीं करते।
उन्होंने कोर्ट का ध्यान राघव मंगूटा के बयान की ओर दिलाया जिसमें अरविंद केजरीवाल के 100 करोड़ रुपये रिश्वत मांगे जाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह बयान जांच अधिकारी के लिए पीएमएलए की धारा 19 में गिरफ्तारी के लिए रीजन टू बिलीव है। प्रथम दृष्टि में केजरीवाल के खिलाफ धारा 4 के अपराध का मामला बनता है। पर्याप्त सामग्री है। जिसके आधार पर जांच अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्टेज पर गवाहों के बयानों की सत्यता नहीं जांची जा सकती। कोर्ट केस के गुण दोष पर नहीं जा सकता।एएसजी राजू धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए गए राघव मंगूटा के बयानों का हवाला दे रहे थे तभी पीठ ने उनसे गवाहों के बयानों को स्वीकारने और संज्ञान में लेने को लेकर कई सवाल किये। पीठ ने कहा कि केजरीवाल की ओर से आरोप लगाया गया है कि ईडी ने गवाहों के उन पूर्व बयानों पर भरोसा नहीं किया है और उसे रिकार्ड पर नहीं लिया है जिसमें केजरीवाल पर आरोप नहीं लगाए गए हैं सिर्फ उन बयानों पर जांच एजेंसी ने विश्वास किया है जिनमें उन पर आरोप लगाया गया है, आप बताइये कि क्या फाइल में आपने उन बयानों को भी शामिल किया है या उन पर भरोसा न करने का कोई कारण दर्ज किया है। एएसजी ने नहीं में जवाब दिया तो पीठ ने कहा कि आपको उसे फाइल में तो दर्ज करना चाहिए था, क्या आप बहस के दौरान अपने केस को इम्प्रूव कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि भले ही आपने उन बयानों पर विश्वास नहीं किया लेकिन आपको दर्ज तो करना चाहिए था कि आपने उस पर विश्वास नहीं किया है। जस्टिस खन्ना ने यह भी कहा कि अगर कोर्ट गिरफ्तारी रद्द करती है,तो वह कह सकती है कि सुसंगत सामग्री पर विचार नहीं किया गया था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मौजूदा मामले के बारे में ऐसा नहीं कह रहे हैं। पीठ ने यह भी कहा कि सरकारी गवाह को भिन्न मानकों पर जांचा जाता है। इस पर एएसजी राजू ने कहा कि उनके पास बयान के समर्थन के साक्ष्य भी मौजूद हैं। 100 करोड़ रिश्वत मांग गई थी। पीठ ने टिप्पणी थी कि रिश्वत की राशि तो अब घट कर 45 करोड़ रह गई है क्योंकि आपके पास मनी ट्रेल तो इतने का ही है। एसवी राजू ने कहा नहीं मनी ट्रेल 45 करोड़ का है लेकिन रिश्वत 100 करोड़ ली गई थी। राजू ने यह भी कहा कि मामले में जब्ती होना जरूरी नहीं है।




















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