न्यूज डेस्क/भोपाल। राजधानी स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में 19.48 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इस मामले में दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाना चाहिए। मध्य प्रदेश शासन को इस सुझाव के साथ तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है। यह जांच रिपोर्ट मध्य प्रदेश शासन तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार तक पहुंचने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल की राशि निजी खाते में डाले जाने की शिकायत की जांच करने विभागीय आदेश गत 19 फरवरी को जारी किए गए थे। तभी तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
जांच समिति ने आज 02 मार्च को प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत किया। प्रथम दृष्टतया जांच प्रतिवेदन अनुसार 19.48 करोड़ रूपये अनाधिकृत रूप से अपराधिक षड्यंत्र कर निजी खातों में स्थानान्तरण करना पाया गया है। शासन द्वारा प्रकरण की गंभीरता के दृष्टिगत प्रकरण की एफआईआर दर्ज किये जाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही तत्काल प्रभाव से तत्कालीन कुलसचिव डॉ. आरएस राजपूत को निलंबित किये जाने का निर्णय लिया गया है। सेवानिवृत्त वित्त नियंत्रक एचके वर्मा के विरूद्ध पृथक से कार्यवाही किये जाने का निर्णय लिया गया है। प्रकरण में राजीव गांधी विश्वविद्यालय के संबंधित शाखा में पूर्व से पदस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों के निलंबन का निर्णय लिया गया है। संबंधित शाखा में संबंधित पदों पर अन्य अमले की पदस्थापना का निर्णय लिया गया है। प्रकरण की गंभीरता के दृष्टिगत एक उच्च
स्तरीय समिति गठित की जा रही है, जो समस्त मामलों की जांच करेगी।




















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