भोपाल/जबलपुर। जबलपुर के कांग्रेसियों का महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू के खिलाफ फूट रहा गुस्सा कई तरह के राजनीतिक मायनों को भी प्रकट कर रहा है। भाजपा में शामिल होने से पहले जगत बहादुर जबलपुर कांग्रेस के तमाम छोटे-बड़े कांग्रेसियों के अन्नू भैया रहे, लेकिन अचानक जबलपुर कांग्रेसियों का खून गर्म हो गया और अपनी पार्टी कांग्रेस के प्रति जिस तरह की भावनाओं और प्रेम का प्रकटीकरण एक-एक कार्यकर्ता के अंदर नजर आ रहा है, वह भी कई तरह के सवालों को जन्म देता है। राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों की मानें तो जिस तरह से सड़कों पर उतरकर कांग्रेसी आंदोलन करते नजर आ रहे हैं,और जगत बहादुर के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं, वह यह दर्शा रहा है कि कांग्रेसियों में अभी भी दम बरकरार है।
यह अलग बात है की कांग्रेसियों के अंदर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के खिलाफ भले ही यह गुस्सा और आंदोलन करने का दमखम जबलपुर शहर के चौराहों में और सड़कों पर नजर ना आए, लेकिन फिलहाल जगत बहादुर के खिलाफ नाराजगी जाहिर करनी है, तो कांग्रेस पार्टी का एक-एक सिपाही एकजुट नजर आ रहा है। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह व्यक्तिगत तौर पर जगत बहादुर को लेकर मन में पल रही नफ़रत है,जो अब अवसर मिलते ही ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ी है या वाकई भाजपा में जाने को लेकर गुस्सा फूट रहा है, लेकिन यह इसलिए हजम नहीं होता कि यदि मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा से इतनी दिक्कत होती तो इसके पहले भी इसी ऊर्जा और जोश के साथ जबलपुर का प्रत्येक कांग्रेसी सड़कों पर आंदोलन करता नजर आता।
अब कांग्रेसी ही जानें किसके प्रति नफरत और किसके प्रति गुस्सा
अब यह तो जबलपुर के कांग्रेसी ही भली भांति जानते हैं कि वह जगत बहादुर से व्यक्तिगत तौर पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं या भाजपा के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। आंदोलन भी जिस तरह के हो रहे हैं वह आश्चर्यचकित करने वाले हैं। सामान्य रूप से हटकर आश्चर्यचकित करने वाले प्रदर्शन हो रहे हैं। महापौर जगत बहादुर को जीते जी श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है, तो कहीं श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं। अर्थ ही जुलूस निकाल कर पुतला दहन भी किया गया। सेवा दल ने तो तर्पण तक कर दिया। यानी कांग्रेसी वह सब कुछ कर रहे हैं जो एक मुख्य विपक्ष में रहते हुए करना चाहिए।
यदि यही गर्माहट बनी रहे तो स्थितियां ही ऐसी निर्मित ना हो
फिर सवाल यह भी उठता है कि आम जनमानस की मुख्य समस्याओं को लेकर कांग्रेसियों का खून क्यों नहीं उबाल मारता। क्या महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी जैसे मुद्दों के साथ शोषित,पीड़ितों की आवाज बनना कांग्रेसियों ने छोड़ दिया है। या फिर अपनी इच्छा, मनमर्जी और सुख सुविधा के मुताबिक ही अब कांग्रेसी सड़क पर आंदोलित होते हैं, जैसा कि अभी नजर आ रहे हैं। वैसे यदि इसी तरह से कांग्रेसियों का खून यदि जनहित में उबाल मारता रहे तो शायद यह स्थितियां निर्मित ना हों, बहरहाल जो है सामने है और इसके राजनीतिक मायने और भाव कई तरह से निकल रहे हैं।



















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